Wednesday, 7 July 2021

राष्ट्र निर्माण में राजभाषा का महत्व

 

निजभषा उन्नति अहै,सब उन्नति को मूल।

बिन निजभाषा ज्ञान के , मिटत न हिय को सूल ।।

भाषा व्यक्ति की सबसे वड़ी शक्ति है।इससे अधिक मूल्यवान संपत्ति उसकी हो ही नहीं सकती। भाषा व्यक्ति की ही नहीं राष्ट्र की भी सबसे बड़ी पहचान है। संस्कृति और संस्कार उनकी भाषा में प्रतिबिंबित होता है। जिन मूलभूत तत्वों के कारण कोई देश राष्ट्र कहलाता है, उनमें उस राष्ट्र के संविधान, राष्ट्रध्वज,, राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रभाषा या राजभाषा का भी महत्वपूर्ण स्थान है। भारत विविधताओं का देश है। यहाँ रीति रिवाज, खानपान, रहन सहन और भाषा के स्तर पर अनेकता पाई जाती है। वास्तव में यही विविधता हमारी पहचान और अनेकता में एकता का प्रतीक है।

      भाषा की शक्ति उसे बोलने वालों में ही निहित है। प्रयोग और उदारता के कारण ही अंग्रेजी विश्व की सबसे विकसित भाषाओं में एक है। अंग्रेजी का विरोध हिंदी को नहीं बढ़ायेगा।हिंदी का आग्रह ही हिंदी को बढ़ायेगा। अंग्रेजी साम्राज्य जहाँ जहाँ गया, अपनी भाषा को लेकर गया। उसने अपनी भाषा का इतना सम्मान किया कि उनके उपनिवेश में रहनेवाला हर व्यक्ति अंग्रेजी पढ़ने और सीखने के पीछे पागल हो गया। उसे लगने लगा कि अंग्रेजी प्रगति और सम्मान दिलाने वाली कुंजी है।

भारत की एकजुटता के लिए हिंदी ने बहुत बड़ा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक  योगदान दिया है। हिंदी के मुकाबले अन्य भारतीय भाषाएँ क्षेत्रीय संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करती है। भारत की भाषाओं में हिंदी ही एक ऐसी  भाषा है, जो कश्मीर से कन्याकुमारी तक तथा कामाख्या से कच्छ तक समझी और बोली जाती है। देश की रक्षा में तैनात वीर सैनिकों को एक सूत्र में बांधने वाली भाषा भी हिंदी है। हिंदी भारत के11 प्रदेशों-उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान,हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखण्ड,दिल्ली तथा अंडमान निकोबार द्वीप समूह की मुख्य भाषा है। विश्व में विकसित राष्ट्र वही है जिसकी जनभाषा,शिक्षा का माध्यम व कार्यभाषा एक हो। दुनिया की कोई महाशक्ति ऐसी नहीं देखी जो किसी विदेशी भाषा के बल पर  महाशक्ति बनी हो।

भावात्मक एकता तभी संभव है, जब पूरे राष्ट्र में भावों के आदान-प्रदान में कोई कठिनाई न हो अर्थात आदान-प्रदान का कोई एक सशक्त माध्यम हो। हिंदी मीडिया, सोशल मीडिया और तकनीकी भाषा के रूप में तेजी से प्रतिष्ठित होती जा रही है।हिंदी फिल्मों एवं हिंदी साहित्य ने भी हिंदी को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है। इस वक्त कई हिंदी ब्लाग चल रहे हैं, जहाँ गंभीर साहित्य सृजन हो रहा है। फेसबुक और इंटरनेट के फैलाव का स्वागत करना चाहिए, क्योकि यह एक ऐसा प्लेटफार्म है जहाँ आपको कबीर, सूर से लेकर अब तक के एकदम नये रचनाकारों की कृतियां एक साथ पढ़ने को उपलब्ध हैं। अतः हिंदी धीरे धीरे संपूर्ण विश्व में अपना प्रभाव जमा रही है। वैश्वीकरण के इस युग में आसमान छूने के लिए अंग्रेजी बेहद ज़रूरी है, लेकिन भारत की जड़ें मजबूत करने के लिए भी हिंदी का प्रयोग अत्यंत आवश्‍यक है। आजकल लोगों में अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूकता और शासन से बेहतर सेवाओं की अपेक्षा बढ़ रही है।    

      सरकार की राजभाषा नीति कार्यान्वयन, प्रेरणा-प्रोत्साहन और सद्भाव पर आधारित है। अतः राजभाषा हिंदी के प्रगामी प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए हमें इसी दिशा में प्रयास करने होंगे तथा राजभाषा के प्रयोग में गर्व का अनुभव करना होगा। राजभाषा हिंदी को प्रोत्साहित करने के लिए  हम सबके द्वारा किया गया अकेला प्रयास भी सागर को भरने वाली बूंद का कार्य करेगा। निसंदेह हिंदी आगे बढ़ेगी। हम संकल्प लें कि हम भाषा के इस पुनीत राष्ट्रीय दायित्व में मन, वचन और कर्म से अपना योगदान प्रदान करेंगे और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देता रहेगा।

 

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