Wednesday, 7 July 2021

राजभाषा संबंधी सूक्तियाँ

 हिंदी की प्रेरक सूक्तियाँ

1.       हिंदी हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का स्रोत है।-              सुमित्रानंदन पंत

2.       प्राचीन हिंदी कवियों के ऐसे-ऐसे गीत मैंने सुने हैं,कि सुनते ही मुझे ऐसा लगा है कि वे आधुनिक युग के हैं। इसका कारण यह है कि जो कविता सत्य है, वह चिरकाल ही आधुनिक है। मैं तुरंत समझ गया कि जिस हिंदी भाषा के खेत में भावों की ऐसी सुनहरी फसल फली है, वह भाषा भले ही कुछ दिन यों ही पड़ी रहे, तो भी उसकी स्वाभाविक उर्वरता नहीं मर सकती, वहाँ फिर खेती के सुदिन आएंगे और पौष मास में नवान्न उत्व होगा।             - रवींद्रनाथ ठाकुर

3.       हिंदी ही हमारे राष्ट्रीय एकीकरण का सबसे शक्तिशाली और प्रधान माध्यम है। यह किसी प्रदेश या क्षेत्र की भाषा नहीं बल्कि समस्त भारत की भारती के रूप में ग्रहण की जानी चाहिए !     कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी

4.       राष्ट्रभाषा हिंदी किसी व्यक्ति या प्रांत की संपत्ति नहीं है, उस पर सारे देश का अधिकार है।  - सरदार वल्लभ भाई पटेल

5.       इतने बड़े देश में जहाँ इतनी भाषाएं हैं, वहाँ देश की एकता के लिए आवश्यक है कि कोई भाषा ऐसी हो जिसे जब बोल सकें, जो एक कड़ी की तरह सबको मिला-जुलाकर रख सके। इसलिए हिंदी को बढ़ाना हम सबका काम है।             - इंदिरा गाँधी

6.       भारतवर्ष की राजभाषा चाहे जो हो और जैसी भी हो, पर इतना निश्चित है कि भारतवर्ष की केंद्रीय भाषा हिंदी है। लगभग आधा भारतवर्ष उसे अपनी साहित्यिक भाषा अर्थात् उसके ह्रदय और मस्तिष्क की भूख मिटानेवाली, करोड़ों की आशा-आकांक्षा, अनुराग-विराग, रुदन-हास्य की भाषा। उसमें साहित्य लिखने का अर्थ है करोड़ों मनुष्यों को मनुष्य के सुख-दुख के प्रति संवेदनशील बनाना, करोड़ों को अज्ञान, मोह और कुसंस्कार से मुक्त करना।                 - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

7.       संस्कृति तब तक गूंगी रहती है- जब तक राष्ट्र की अपनी वाणी नहीं होती, राष्ट्रभाषा नहीं होती। विश्व चेतना जगाने से पहले देश में राष्ट्रभाषा की चेतना जगाएं।  --   महादेवी वर्मा

8.       देश के सबसे भू-भाग में बोली जाने वाली हिंदी ही राष्ट्रभाषा पद की अधिकारिणी है।  - नेताजी सुभाष चन्द्र बोस

9.       राष्ट्रभाषा न किसी प्रदेश की होती है, न किसी जाति की, वह सारे राष्ट्र की होती है। - सरदार पटेल  

10.   भारत के विभिन्न प्रदेशों के बीच हिंदी प्रचार के द्वारा एकता स्थापित करने वाले लोग सच्चे भाकतबंधु हैं।  -  महर्षि अरविंद

11.   हिंदी वह धागा है जो विभिन्न मातृभाषाओं रूपी फूलों को पिरोकर भारत के लिए सुंदर हार का सृजन करेगा।  - लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक

12.   राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी हमारे देश की एकता में सबसे अधिक सहायक सिद्ध होगी, इसमें दो राय नहीं।  - पंडित जवाहर लाल नेहरू 

13.    हिंदी को आप हिंदी कहें या हिंदुस्तानी, मेरे लिए तो दोनों एक ही हैं। हमारा कर्तव्य यह है कि हम अपना राष्ट्रीय कार्य हिंदी भाषा में करें।      - महात्मा गांधी                          

14.   शब्द के एकीकरण के लिए सर्वमान्य भाषा से अधिक बलशाली कोई तत्व नहीं। मेरे विचार में हिंदी ही ऐसी भाषा है।– लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक

15.   भाषा और संस्कृति से खिलवाड़ करनेवाले राजनीतिज्ञ आते हैं, चले जाते हैं। ये राजनीतिज्ञ आज हैं और कल नहीं रहेंगे, किंतु भारतीय संस्कृति की प्रतीक हिंदी सदा अमर रहेगी।   -पुरुषोत्तमदास टंडन 

16.    हम सभी भारतवासियों का यह अनिवार्य कर्तव्य है कि हम हिंदी कौ अपनी भाषा के रूप में अपनाएं।  - डॉ. अंबेडकर 

17.   हिंदी चिरकाल से ऐसी भाषा रही है, जिसने मात्र विदेशी होने के कारण किसी एक का बहिष्कार नहीं किया।       -  डॉ. राजेन्द्र प्रसाद 

18.    प्रांतीय ईर्ष्या व द्वेष दूर करने में जितनी सहायता हिंदी प्रचार से मिलेगी, उतनी सहायता किसी दूसरी चीज़ से नहीं।      -  सुभाष चंद्र बोस

19.   राष्ट्रीय व्यवहार में हिंदी को काम में लाना देश की शीघ्र उन्नति के लिए आवश्यक है।    – महात्मा गांधी  

20.   मैं मानता हूँ कि भारत की आधुनिक भाषाओं में हिंदी ही सच्चे अर्थों में सदैव भारतीय भाषा रही है, क्योंकि वह निरंतर भारत की एक समग्र चेतना को वाणी देने का चेतन प्रयास करती रही है।  - अज्ञेय                    

21.   मातृभाषा का अनादर माँ के अनादर के बराबर है, जो मातृभाषा का अपमान करता है, वह स्वदेश भक्त कहलाने के लायक नहीं है।    -        महात्मा गांधी     

22.   हिंदी राष्ट्रीयता के मूल को खींचती है और उसे दृढ़ करती है, देशका कोई भी सत्ता प्रेमी हिंदी का तिरस्कार नहीं कर सकता। दुनिया से कह दो कि गांधी अंग्रेजी नहीं जानता।    - महात्मा गांधी

23.   हिंदी देश की एकता की ऐसी कड़ी है, जिसे मजबूत करना प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य है।

24.                                                               –इंदिरा गांधी

कोकोई भी देश सच्चे अर्थों में तब तक स्वतंत्र नहीं है, जब तक वह अपनी भाषा में नहीं बोलता।                      - महात्मा गांधी 

 जनतंत्र  के लिए जरूरी है कि वह जनता की भाषा में काम करें। - डॉ राम मनोहर लोहिया                   

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