Saturday, 10 July 2021

विश्व हिंदी सम्मेलन

विश्व हिंदी सम्मेलन हिंदी भाषा का सबसे बड़ा अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन है, जिसमें विश्व भर से हिंदी विद्वान, साहित्यकार, पत्रकार, भाषा विज्ञानी, विषय विशेषज्ञ तथा हिंदी प्रेमी जुटते हैं। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के प्रति जागरुकता पैदा करने, समय-समय पर हिंदी की विकास यात्रा का आकलन करने, लेखक व पाठक दोनों के स्तर पर  हिंदी साहित्य के प्रति सरोकारों को और दृढ़ करने, जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहन देने तथा हिंदी के प्रति प्रवासी भारतीयों के भावुकतापूर्ण रिश्तों को और अधिक गहराई व मान्यता प्रदान करने के उद्देश्य से 1975 में विश्व हिंदी सम्मेलनों की शृंखला आरम्भ की गयी। प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन 10 से 14 जनवरी, 1975 को नागपुर में आयोजित किया गयासम्मेलन में निम्न लिखित तीन विषयों को केंद्र में रख कर विचार गोष्ठियाँ की गई

(क) हिंदी की अंतरराष्ट्रीय स्थिति,(ख) विश्व मानव की चेतना, भारत और हिंदी, (ग) आधुनिक युग और हिंदीः आवश्यकताएँ और उपलब्धियाँ।

उपर्युक्त  विषयों पर गहन विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से निम्नलिखित निर्णय लिए गए:-

1.    संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थान दिया जाए,

2.    वर्धा में विश्व हिंदी विद्यापीठ की स्थापना हो,

3.    विश्व हिंदी सम्मेलनों को स्थायित्व प्रदान करने के लिए ठोस योजना बनाई जाए।

द्वितीय विश्व हिंदी सम्मेलन मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुई के महात्मा गांधी संस्थान में 28 से 30 अगस्त,1976 तक आयोजित किया गया। सम्मेलन के शैक्षिक सत्रों में हिंदी की अंतरराष्ट्रीय स्थिति’‘शैली और स्वरूप’, ‘जनसंचार के साधन और हिंदी’, ‘हिंदी के प्रचार में स्वैच्छिक संस्थाओं की भूमिका तथा विश्व में हिंदी के पठन-पाठन की समस्यापर विश्व भर से आए हिंदी विद्वानों ने गहन विचार विमर्श किया।

तृतीय विश्व हिंदी सम्मेलन 28 से 30 अक्तूबर,1983 तक नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में हुआ।  सम्मेलन के विचार सत्रों के खुले अधिवेशन के तीन सत्रों में- (1) अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी के प्रसार की संभावनाएँ और प्रयास,(2) भारत के सांस्कृतिक संबंध और हिंदी तथा मानव-मूल्यों की स्थापना में हिंदी की भूमिका पर गंभीर चर्चा हुई। इनके अतिरिक्त हिंदी तथा भारतीय भाषाओं से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रूप से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर पंद्रह समानांतर संगोष्टियाँ आयोजित की गई।

चतुर्थ विश्व हिंदी सम्मेलन 2 से 4 दिसंबर, 1993 को मॉरीशस में आयोजित किया गया।

            चतुर्थ विश्व हिंदी सम्मेलन का केंद्रीय विषय था- विश्व में हिंदी ।सम्मेलन में यह मंतव्य पारित किया गया कि –(1) विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस में स्थापित किया जाए, (2) भारत में अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय स्थापित किया जाए, (3) विभिन्न विश्वविद्यालयों में हिंदी पीठ खोले जाएँ, (4) भारत सरकार विदेशों से प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकें प्रकाशित करने में सक्रिय सहायता करे, (5) हिंदी को विश्व मंच पर उचित स्थान दिलाने में शासन और जन समुदाय विशेष प्रयत्न करे, (6) विश्व के समस्त हिंदी-प्रेमी अपने निजी एवं सार्वजनिक कार्यों में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करें और सम्मेलन के सभी प्रतिनिधि अपने-अपने देशों की सरकारों से संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने के लिए समर्थन प्राप्त करने का सार्थक प्रयास करें। चतुर्थ विश्व हिंदी सम्मेलन से ही यह आयोजन भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित होने लगा।

पंचम विश्व हिंदी सम्मेलन 4 से 8 अप्रैल, 1996 को त्रिनिदाद एवं टोबैगो की राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन में संपन्न हुआ। सम्मेलन द्वारा पारित मंतव्य में कहा गया कि – (1) विश्वव्यापी भारत वंशी समाज हिंदी को अपनी संपर्क भाषा के रूप में स्थापित करेगा, (2) मॉरीशस में विश्व हिंदी सचिवालय की स्थापना के लिए भारत में एक अंतर-सरकारी समिति बनाई जाए, (3) सभी देशों, विशेषकर जिन देशों में अप्रवासी भारतीय बड़ी संख्या में हैं, उनकी सरकारें अपने-अपने देशों में हिंदी के अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था करें, (4) उन देशों की सरकारों से आग्रह किया जाए कि वे हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की भाषा बनाने के लिए राजनीतिक योगदान और समर्थन दें।

छठा विश्व हिंदी सम्मेलन 14 से 18 सितंबर, 1999 तक यू.के.गीतांजलि बहुभाषीय साहित्यिक समुदाय( बर्मिघम), भारतीय भाषा संगम (यार्क) तथा ब्रिटेन के हिंदी-प्रेमी अन्य संगठनों के सहयोग से स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रिकन स्टडीज के प्रागण में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का बोध-वाक्य था- हिंदी और भावी पीढ़ी विचार सत्रों में सूचना प्रौद्योगिकी में हिंदी,ज्ञान-विज्ञान की भाषा हिंदी, युव पीढ़ी और हिंदी के अलावा हिंदी के प्रचार-प्रसार में विश्व हिंदी सम्मेलनों के योगदान पर विशेष रूप से विचार-मंथन किया गया। इस सम्मेलन में पारित मंतव्य में यह कहा गया है कि (1) विश्व भर में हिंदी के अध्ययन -अध्यापन, शोध, प्रचार-प्रसार और हिंदी सृजन में समन्वय के लिए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र की सक्रिय भूमिका निभाएँ, (2) विदेशों में हिंदी के शिक्षण , पाठ्यक्रमों का निर्धारण, पाठ्य पुस्तकों के निर्माण, अध्यापकों के प्रशिक्षण आदि की व्यवस्था भी विश्वविद्यालय करे और सुदूर शिक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाएं,(3) मॉरीशस सरकार अन्य हिंदी प्रेमी सरकारों सेपरामर्श कर शीघ्र विश्व हिंदी सचिवालय स्थापित करे, (4) हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ में मान्यता दी जाए,(5) हिंदी की सूचना तकनीक के विकास, मानकीकरण, विज्ञान एवं तकनीकी लेखन, प्रसारण एवं संचार की अद्यतन तकनीक के विकास के लिए भारत सरकार एक केंद्रीय एजेंसी स्थापित करे,(6) नई पीढ़ी में हिंदी को लोकप्रिय बनाने के लिए आवश्यक पहल की जाए,(7) भारत सरकार विदेश स्थित अपने दूतावासों को निवेश दे कि भारतवंशियों की सहायता से विद्यालयों में एक भाषा के रूप में हिंदी शिक्षण की व्यवस्था की जाए।

सातवाँ विश्व हिंदी   5 से 9 जून, 2003 को सूरीनाम की राजधानी पारामारिबो में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय था-विश्व हिंदीः नई शताब्दी की चुनौतियाँ। इस सम्मेलन में पारित 10 संकल्पों में- संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने, विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी पीठ की स्थापना, भारतीय मूल के लोगों के बीच हिंदी के प्रयोग के प्रभावी उपाय, हिंदी के प्रचार हेतु वेबसाइट की स्थापना और सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग, हिंदी विद्वानों की विश्व-निर्देशिका का प्रकाशन, विश्व हिंदी दिवस का आयोजन, कैरेबियन हिंदी परिषद् की स्थापना, दक्षिण भारत के विश्वविद्यालयों में हिंदी विभाग की स्थापना, हिंदी पाठ्यक्रम में विदेशी हिंदी लेखकों की रचनाओं को शामिल करना तथा सूरीनाम में हिंदी शिक्षण की व्यवस्था पर विशेष रूप से जोर दिया गया है।

आठवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन 13 से 15 जुलाई, 2007 को संयुक्त राज्य अमेरिका की राजधानी न्यूयॉर्क में आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का केंद्रीय विषय था- विश्व मंच पर हिंदी। इस सम्मेलन में निम्न लिखितप्रस्ताव पारित किए गएः-

      (1)   विदेशों में हिंदी शिक्षण और देवनागरी लिपि को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से दूसरी भाषा के रूप में हिंदी शिक्षण के लिए एक मानक पाठ्यक्रम बनाया जाए तथा हिंदी के शिक्षकों को मान्यता प्रदान करने की व्यवस्था की जाए।

(2)   विश्व हिंदी सचिवालय के कामकाज को सक्रिय करने एवं उद्देश्य परक बनाने के लिए सचिवालय को भारत तथा मॉरीशस सरकार सभी प्रकार की प्रशासनिक एवं आर्थिक सहायता प्रदान करें और दिल्ली सहित विश्व के चार-पाँच अन्य देशों में इस सचिवालय के क्षेत्रीय कार्यालय खोलने पर विचार किया जाए। हिंदी भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए विश्व मंच पर हिंदी वेबसाइट बनाई जाए।

(3)   हिंदी में ज्ञान-विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी विषयों पर सरल एवं उपयोगी हिंदी पुस्तकों के सृजन को प्रोत्साहित किया जाए। हिंदी में सूचना प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाने के प्रभावी उपाय किए जाएं। एक सर्वमान्य‍ व सर्वत्र उपलब्ध यूनिकोड को विकसित व सर्वसुलभ बनाया जाए।

(4)   विदेशों में जिन विश्वविद्यालयों तथा स्कूलों में हिंदी का अध्ययन-अध्यापन होता है उनका एक डेटाबेस बनाया जाए और हिंदी अध्यापकों की एक सूची भी तैयार की जाए।

(5)   यह सम्मेलन विश्व के सभी हिंदी प्रेमियों और विशेष रूप से प्रवासी भारतीयों तथा विदेशों में कार्यरत भारतीय राष्ट्रिकों से भी अनुरोध करता है कि वे विदेशों में हिंदी भाषा, साहित्य के प्रचार-प्रसार में योगदान करें।

(6)   वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में विदेशी हिंदी विद्वानों के अनुसंधान के लिए शोधवृत्ति की व्यवस्था की जाए।

(7)   केंद्रीय हिंदी संस्थान भी विदेशों में हिंदी के प्रचार-प्रसार व पाठ्यक्रमों के निर्माण में अपना सक्रिय सहयोग दे।

(8)   विदेशी विश्वविद्यालयों में हिंदी पीठ की स्थापना पर विचार-विमर्श किया जाए।

(9)   हिंदी को साहित्य‍ के साथ-साथ आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और वाणिज्य की भाषा बनाया जाए।

(10)  भारत द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तरों पर आयोजित की जाने वाली संगोष्ठियों व सम्मेलनों में हिंदी को प्रोत्साहित किया जाए।

नौवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन  22 से 24 सितम्बर 2012 तक, दक्षिण अफ्रीका के शहर जोहान्सबर्ग में किया गया। इस सम्मेलन में 22 देशों के 600 हिंदी विद्वानों, साहित्‍यकारों और हिंदी प्रेमियों आदि ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का मुख्य विषय रखा गया था- भाषा की अस्मिता और हिंदी का वैश्विक संदर्भ। सम्मेलन में शैक्षिक सत्रों के विषय निम्नानुसार रखे गए थेः-

1)  महात्मा गांधी की भाषा दृष्टि और वर्तमान का संदर्भ

2)  हिंदीः फिल्म, रंगमंच और मंच की भाषा

3)  सूचना प्रौद्योगिकीः देवनागरी लिपि और हिंदी का सामर्थ्य

4)  लोकतंत्र और मीडिया की भाषा के रूप में हिंदी

5)  विदेश में भारतः भारतीय ग्रथों की भूमिका

6)  ज्ञान-विज्ञान और रोजगार की भाषा के रूप में हिंदी

7)  हिंदी के विकास में विदेशी/प्रवासी लेखकों की भूमिका

8)  हिंदी के प्रसार में अनुवाद की भूमिका

9)  दक्षिण अफ्रिका में हिंदी शिक्षा-युवाओं का योगदान

दसवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन 10 सितम्बर से 12 सितम्बर, 2015 तक भारत के मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुआ। सम्मेलन का मुख्य विषय "हिंदी जगत : विस्तार एवं संभावनाएं " था। समानांतर सत्रों में (1) विदेश नीति में हिंदी (2) प्रशासन में हिंदी(3) विज्ञान क्षेत्र में हिंदी (4) संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी में हिंदी (5) बाल साहित्य में हिंदी (6) गिरमिटिया देशों में हिंदी (7) विदेशियों के लिए भारत में हिंदी अध्ययन की सुविधा (8) पत्रकारिता और हिंदी विषय रखे गए।

ग्यारहवाँ विश्व हिंदी सम्मेलन 18 से 20 अगस्त, 2018 तक मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुई में आयोजित किया गया। सम्मेलन का मुख्य विषय था हिंदी विश्व और भारतीय संस्कृति। इस सम्मेलन में हिंदी भाषा पर ही नहीं, बल्कि हिंदी भाषा और उससे जुड़ी संस्कृति पर बात हुई।हिंदी और भारतीय संस्कृति के साथ प्रौद्योगिकी के माध्यम से हिंदी सहित भारतीय भाषाओं का विकास’, ‘प्रवासी समाजः भाषा और संस्कृति जैसे विभिन्न 08 विषयों पर समानांतर सत्र भी रखे गए। सम्मेलन में प्रस्ताव पारित किया कि हिंदी संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनाया जाय

 


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