संसदीय राजभाषा समिति
संसदीय राजभाषा समिति, राजभाषा
अधिनियम 1963 में की गई व्यवस्था के परिणामस्वरूप अस्तित्व में आई। समिति का गठन
अधिनियम की धारा 4 के तहत वर्ष 1976 में किया गया। बाद में 1977,1980, 1984,1989,1991,1996,1998,1999, 2004,2009, 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों के पश्चात् समिति का पुनर्गठन हुआ। है। इस
समिति में 30 सदस्य होंते हैं, जिनमें 20 लोकसभा के सदस्य तथा
10 राज्यसभा के सदस्य होते हैं।इस समिति का कर्तव्य होगा कि वह संघ के राजकीय
प्रयोजनों के लिए हिंदी के प्रयोग में की गई प्रगति का पुनर्विलोकन करें और उस पर
सिफारिशें करते हुए राष्ट्रपति को प्रतिवेदन करें और राष्ट्रपति उस प्रतिवेदन को संसद के हर एक सदन
के समक्ष रखवाएगा और सभी राज्य सरकारों को भिजवाएगा।
संसदीय राजभाषा समिति का सचिवालय बिल्कुल अलग है।
परंपरा के अनुसार इस समिति के अध्यक्ष भारत सरकार के गृहमंत्री होते हैं। इस समिति
के कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए समय-समय पर अनेक उपसमितियों का गठन होता रहा है। 1976 में गठन से
लेकर अब तक इस समिति ने देश-विदेश में लगभग 12600 से अधिक कार्यालयों का निरीक्षण तथा शिक्षा प्रचार में लगे
हुए स्वयंसेवी संगठनों,मंत्रालय के सचिवों, उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों, मुख्य
मंत्रियों, विधि विशेषज्ञों, विभिन्न
क्षेत्रों के लगभग 2500 से अधिक गणमान्य व्यक्तियों के साथ मौखिक साक्ष्य एवं
विचार-विमर्श किया है। इन्हीं निरीक्षण / साक्ष्यों के आधार
पर समिति अपने प्रतिवेदन तैयार करती रही है। समिति अब तक अपने प्रतिवेदन के नौ खंड
राष्ट्रपति जी प्रस्तुत कर चुकी है।
निरीक्षण किए जाने वाले कार्यालय
के प्रशासनिक प्रधान द्वारा ध्यान देने योग्य बातें।
1. निर्धारित प्रश्नावली की प्रतियां हिंदी और अंग्रेजी
में भरकर मंत्रालय की सहमति के बाद समिति सचिवालय को निर्धारित तिथि तक भेज दी
जानी चाहिए।
2. उन अधिकारियों की सूची समिति सचिवालय को प्रेषित की
जाए जो हिंदी के कार्यान्वयन के कार्य से या हिंदी संवर्ग से जुड़े हों तथा बैठक
में उपस्थित हो रहे हों।
3. सम्मेलन कक्ष में बैठने का क्रम सिटिंग प्लान के
अनुसार होना चाहिए।
4. बैठक में भाग लेने वाले अधिकारियों के नामों और पदनामों की पट्टियां
मेज पर लगी होनी चाहिए।
5. बैठक कक्ष में समिति के सदस्यों के आगमन से पहले सभी
व्यक्तियों को अपनी सीटों पर पहले से विराजमान होना चाहिए।
6.यह सुनिश्चित कर लिया जाना चाहिए कि बैठक में
विचार-विमर्श किए जाने वाले कार्यालयों के प्रशासनिक प्रधान तथा उनके वरिष्ठ सहयोगी जो हिंदी के
कार्यान्वयन या हिंदी संवर्ग के कार्य से जुड़े हों, उपस्थित रहें।
7. सभी सामग्री एवं सांख्यिकीय सूचनाएं आदि विचार-विमर्श
के समय तैयार रखी जाएं। हिंदी के प्रगामी प्रयोग संबंधी आदेशों, तिमाही प्रगति
रिपोर्ट, राजभाषा कार्यान्वयन समिति के गठन एवं बैठकों
संबंधी मिसिल , प्रशिक्षण रोस्टर तथा अन्य रजिस्टर आदि बैठक कक्ष में तैयार रखे
जाएं।
8. प्रशासनिक प्रधान संघ की
राजभाषा नीति के कार्यान्वयन के संबंध में
कार्यालय द्वारा किए गए प्रयासों , इस दिशा में हुई उपलब्धियों तथा आगामी योजनाओं का विवरण देंगे।
9. समिति द्वारा पूछे गए प्रश्नों
के उत्तर संक्षिप्त, संगत और सही होने चाहिए।
10. पूछे गए प्रश्नों के उत्तर
यथासंभव उस व्यक्ति द्वारा दिया जाना चाहिए जिससे प्रश्न पूछा गया हो।
11. निम्न बातों से समिति की
मर्यादा भंग होती है और उसका अपमान होता हैः-
(क) उत्तर देने से इंकार करना।
(ख) असल बात को घुमा-फिराकर कहना, गलत दस्तवेज
प्रस्तुत करना, सत्य को छिपाना अथवा समिति को गुमराह करना।
(ग) अपमानजनक उत्तर
संसदीय राजभाषा समिति की निरीक्षण
बैठक में अपेक्षित दस्तावेजों की सूची
1.
धारा 3(3) के कागजात के फोल्डर
2.
आश्वासनों पर की गई कार्रवाई की फाइल
3.
कार्यालय को अधिसूचित करने संबंधी फाइल
4.
कोड/ मैनुअल संबंधी विवरण
5.
द्विभाषी रजिस्टर /हिंदी प्रविष्टियों वाले रजिस्टर
6.
मोहरों की छाप
7.
हिंदी पत्राचार की फाइल
8.
हिंदी प्रशिक्षण की फाइल
9.
हिंदी पुस्तकों की खरीद संबंधी फाइल
10. कुछ सेवा पुस्तिकाएँ
11. राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक
संबंधी फाइल
12. हिंदी कार्यशाला संबंधी फाइल
13. हिंदी दिवस/ पखवाड़ा संबंधी फाइल
14. हिंदी विज्ञापन संबंधी फाइल
15. अन्य संगत कागजात
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